गांजा (कैनबिस) या भांग: औषधीय महत्व और इतिहास/Cannabis

गांजा, जिसे वैज्ञानिक रूप से कैनबिस (Cannabis) कहा जाता है, एक प्राचीन औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग हजारों वर्षों से विभिन्न संस्कृतियों में औषधीय, धार्मिक, और मनोरंजक उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। भारत में इसे भांग, गांजा, चरस जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। यह पौधा अपने सक्रिय रसायनों जैसे टीएचसी (THC) और सीबीडी (CBD) के लिए प्रसिद्ध है।

गांजा का इतिहास

1. प्राचीन भारत में उपयोग:

वेदों में इसे “सुखदायक औषधि” के रूप में वर्णित किया गया है। खासकर अथर्ववेद में इसे पवित्र और औषधीय पौधा माना गया है।

भांग को शिव जी का प्रसाद माना जाता है, और कई धार्मिक अनुष्ठानों में इसका प्रयोग होता है।

2. दुनिया में प्राचीन उपयोग:

चीन में 4000-5000 साल पहले इसका उपयोग औषधीय रूप से किया जाता था।

मिस्र और ग्रीक सभ्यता में दर्द निवारक और उपचार के लिए इसका उपयोग किया गया।

19वीं सदी में पश्चिमी दुनिया में इसका उपयोग मिर्गी, दर्द और नींद से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया गया।

3. आधुनिक समय में उपयोग:

20वीं सदी में, कई देशों में इसे गैर-कानूनी घोषित किया गया, लेकिन हाल के दशकों में इसके औषधीय लाभों के कारण इसे फिर से स्वीकृति मिल रही है।


औषधीय महत्व

गांजा के विभिन्न घटक, जैसे टीएचसी (Tetrahydrocannabinol) और सीबीडी (Cannabidiol), इसे औषधीय गुण प्रदान करते हैं।

1. दर्द प्रबंधन:

पुरानी बीमारियों जैसे कैंसर, गठिया, और न्यूरोपैथिक दर्द में उपयोगी।

दर्द निवारक के रूप में दवाओं में उपयोग।

2. मानसिक स्वास्थ्य:

सीबीडी अवसाद, चिंता, और PTSD (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसी समस्याओं में फायदेमंद है।

नींद विकारों (अनिद्रा) के लिए उपयोगी।

3. मिर्गी और न्यूरोलॉजिकल विकार:

सीबीडी-आधारित दवाएं मिर्गी और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के इलाज में प्रभावी पाई गई हैं।

4. कैंसर में सहायक:

कैंसर से जुड़े मतली और उल्टी के लक्षणों को कम करता है।

कुछ शोध बताते हैं कि यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को धीमा कर सकता है।

5. प्रतिरक्षा तंत्र में सुधार:

शरीर के इन्फ्लेमेशन (सूजन) को कम करता है।

ऑटोइम्यून रोगों में सहायक।

6. मल्टीपल स्केलेरोसिस:

मांसपेशियों की अकड़न और दर्द को कम करने में मदद करता है।

गांजा का भारत में औषधीय उपयोग

भारत में भांग और गांजा आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है।

भांग का शरबत: गर्मी और तनाव को कम करने के लिए।

भस्म और तेल: गठिया, त्वचा रोग, और दर्द के इलाज के लिए।

भांग का चूर्ण: पाचन में सुधार और भूख बढ़ाने के लिए।

गांजा का कानूनी पक्ष

1. भारत में स्थिति:

एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत गांजा के उत्पादन और उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन भांग कुछ राज्यों में कानूनी है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा और अनुसंधान के लिए इसका सीमित उपयोग कानूनी है।

2. दुनिया में स्थिति:

कई देशों जैसे कनाडा, अमेरिका के कुछ राज्यों, और यूरोप में औषधीय गांजा वैध है।

कई देशों में इसे पूरी तरह कानूनी दर्जा दिया गया है।


गांजा के दुष्प्रभाव

अत्यधिक उपयोग से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।

टीएचसी की उच्च मात्रा से मतिभ्रम, स्मृति हानि, और निर्णय क्षमता में कमी हो सकती है।

नियमित उपयोग से शारीरिक और मानसिक निर्भरता हो सकती है।

निष्कर्ष

गांजा एक प्राचीन और प्रभावी औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग सही मात्रा और दिशा-निर्देश के तहत किया जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों में लाभदायक हो सकता है। हालांकि, इसके दुरुपयोग से बचना आवश्यक है। वर्तमान में, इसके औषधीय गुणों पर शोध और चिकित्सा क्षेत्र में इसके उपयोग की संभावना बढ़ रही है।

क्या आप इसके किसी विशेष पहलू पर अधिक जानकारी चाहते हैं?

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