कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा (पूरणमासी) को मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसे कई क्षेत्रों में त्रिपुरी पूर्णिमा और देव दीपावली (देवताओं की दीपावली) के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी तुलसी की पूजा का महत्व है।
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा एक अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है, जो कार्तिक मास के अंत का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास को ‘धर्म का महीना’ कहा जाता है, और इस पूरे महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है।
इस दिन भगवान शिव और त्रिपुरासुर नामक राक्षस के बीच हुए युद्ध का अंत हुआ था, जिसमें शिवजी ने त्रिपुरासुर का वध कर धर्म की स्थापना की थी। इसी कारण इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। देव दीपावली का अर्थ है ‘देवताओं की दीपावली,’ और यह मान्यता है कि इस दिन देवता स्वर्ग में दीप जलाकर उत्सव मनाते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा के प्रमुख अनुष्ठान और रिवाज
1. पवित्र स्नान: कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग प्रातःकाल गंगा, यमुना, और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इसे “कर्मों का शुद्धिकरण” और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। वाराणसी और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थानों पर स्नान का विशेष महत्व है।
2. दीप जलाना (दीपदान): इस दिन विशेष रूप से घरों, मंदिरों और नदी किनारे दीप जलाए जाते हैं। इसे देव दीपावली का स्वरूप भी कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इस दिन देवता भी दीप जलाकर पृथ्वी पर आते हैं और उत्सव मनाते हैं। वाराणसी में गंगा के घाटों पर दीपदान का विशेष महत्व है।
3. दान-पुण्य: इस दिन दान और पुण्य कार्यों का बहुत अधिक महत्व होता है। लोग गरीबों, साधुओं, और ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन दान करने से विशेष फल मिलता है और पापों से मुक्ति मिलती है।
4. भगवान शिव और विष्णु की पूजा: इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। शिवालयों और विष्णु मंदिरों में भक्त बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ इस दिन तुलसी माता की भी पूजा की जाती है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
5. व्रत और कथा सुनना: इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं और धार्मिक कथाएं सुनते हैं। त्रिपुरासुर वध की कथा और सत्यनारायण व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व है।
6. कार्तिक स्नान का समापन: कार्तिक मास के दौरान सुबह स्नान का विशेष महत्व होता है, और कार्तिक पूर्णिमा के दिन यह मासिक स्नान का समापन होता है। लोग पूरे महीने ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान और पूजा करते हैं, और इस दिन समापन पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
1. गंगा महोत्सव (वाराणसी): वाराणसी में गंगा के तट पर यह दिन विशेष रूप से मनाया जाता है, जहां हजारों दीप जलाकर गंगा महोत्सव मनाया जाता है।
2. गुरु नानक जयंती: सिख धर्म में यह दिन गुरु नानक देव जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिसे “प्रकाश पर्व” भी कहा जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में कीर्तन और लंगर का आयोजन होता है।
3. ओडिशा में बाली यात्रा: ओडिशा में इस दिन बाली यात्रा का आयोजन होता है, जो समुद्री यात्रा की परंपरा को मनाने के लिए है। यह त्योहार ऐतिहासिक व्यापार यात्रा को दर्शाता है, जब व्यापारी समुद्र मार्ग से दूर-दूर तक जाते थे।
4. तमिलनाडु में कार्तिगाई दीपम: तमिलनाडु में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कार्तिगाई दीपम उत्सव मनाया जाता है, जिसमें विशेष दीप जलाकर भगवान शिव की आराधना की जाती है।
कार्तिक पूर्णिमा आध्यात्मिकता, धार्मिकता, और समाज सेवा का प्रतीक है। इस दिन का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि, पापों से मुक्ति, और धार्मिक कृत्यों के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करना है।