धनतेरस, जिसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, दिवाली के त्योहार का पहला दिन होता है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और इसे मुख्य रूप से धन और स्वास्थ्य से संबंधित विशेष त्योहार माना जाता है। इसके साथ जुड़ी कई कहानियां और मान्यताएं हैं जो इस दिन को विशेष बनाती हैं।

धनतेरस का महत्व और कारण
धनतेरस का मुख्य उद्देश्य घर में सुख, समृद्धि, और स्वास्थ्य लाना होता है। इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है, जो धन और समृद्धि के देवता माने जाते हैं। इसके अलावा, घर में नए बर्तन, सोना, चांदी, गहने या अन्य कीमती वस्त्र खरीदना शुभ माना जाता है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि नए सामान की खरीदारी से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में खुशहाली आती है।
धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा
धनतेरस के दिन की एक प्रसिद्ध कथा राजा हिम से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि राजा हिम के पुत्र की कुंडली के अनुसार उसकी मृत्यु विवाह के चौथे दिन सांप के काटने से होनी थी। उसकी पत्नी ने इस अनहोनी को टालने के लिए उस दिन जागरण किया और अपने पति को सोने नहीं दिया। उसने अपने कक्ष के दरवाजे पर सोने और चांदी के सिक्कों का ढेर लगा दिया और हर कोने में दीए जलाए ताकि उनके कमरे में कोई अंधेरा न हो।
जब मृत्यु के देवता यमराज सांप के रूप में आए, तो वे चमचमाते सिक्कों और प्रकाश से चकित हो गए और कमरे में प्रवेश न कर सके। इस तरह राजा हिम के पुत्र की जान बच गई। इस दिन को तभी से यमदीपदान भी कहा जाता है, और मान्यता है कि धनतेरस की रात घर में दीए जलाने से नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य दूर रहता है।
भगवान धन्वंतरि का जन्म

धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि से भी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं और असुरों ने अमृत निकालने के लिए समुद्र का मंथन किया, तो भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरि का जन्म माना जाता है, इसलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और आयुर्वेद के देवता माना जाता है। उन्होंने आयुर्वेद का ज्ञान दिया और समाज में स्वास्थ्य का प्रचार किया। यही कारण है कि इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा कर उनसे आरोग्य और दीर्घायु की कामना करते हैं। आयुर्वेद में विश्वास रखने वाले लोग इस दिन विशेष हवन और पूजा करते हैं ताकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
धनतेरस पर विशेष रिवाज
धनतेरस के दिन कुछ विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं:
1. धन की पूजा: इस दिन लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजा करते हैं और देवी लक्ष्मी से धन, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं।
2. धनवर्धन की प्रतीक खरीदारी: बर्तन, गहने, सोना, चांदी, और अन्य कीमती सामान खरीदना शुभ माना जाता है।
3. यमदीपदान: परिवार के स्वास्थ्य और शांति के लिए घर के द्वार पर रात में दीया जलाने की परंपरा है। इसे यमराज के नाम पर जलाया जाता है ताकि घर के सदस्य लंबी आयु पाएं और बुरी शक्तियों से बचे रहें।
4. आयुर्वेदिक हवन: कुछ लोग भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा और हवन करते हैं, विशेष रूप से वो लोग जो आयुर्वेद से जुड़े होते हैं। आयुर्वेद में स्वास्थ्य और शुद्धि के लिए इस दिन विशेष जड़ी-बूटियों के प्रयोग किए जाते हैं।
धनतेरस का उद्देश्य सिर्फ भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक समृद्धि को प्राप्त करना भी होता है। इस दिन सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए घर की सफाई और सजावट भी की जाती है ताकि लक्ष्मी जी का स्वागत किया जा सके।