बदलते मौसम में बच्चों की त्वचा पर लाल दाने और खुजली होना एक सामान्य समस्या है, जिसे अक्सर पिटिरियासिस एल्बा, पिटिरियासिस रोज़िया, या अन्य त्वचा संबंधित समस्याओं से जोड़ा जा सकता है। बदलते मौसम, विशेष रूप से सर्दी से गर्मी या बरसात के समय में, बच्चों की त्वचा पर इसका असर जल्दी होता है। इस प्रकार की समस्याएँ सूखी त्वचा, इम्यून सिस्टम की कमज़ोरी, या नमी की वजह से पैदा होती हैं।
कारण

1. सूखा मौसम: बदलते मौसम में हवा की नमी का स्तर बदलता है, जो बच्चों की संवेदनशील त्वचा को प्रभावित करता है।
2. इम्यून सिस्टम का कमजोर होना: बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह से विकसित नहीं होता, इस वजह से उन्हें इन्फेक्शन जल्दी होता है।
3. पसीना और नमी: गर्म मौसम में पसीने के कारण त्वचा पर बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे दाने और खुजली की समस्या होती है।
4. धूप और UV किरणें: सीधे धूप में खेलने से बच्चों की त्वचा पर रिएक्शन हो सकता है।
बचाव के उपाय
1. सही कपड़े पहनाना:
बच्चों को हल्के, सूती कपड़े पहनाएं जो उनकी त्वचा को सांस लेने में मदद करें और पसीने को सोख सकें।
तंग कपड़े न पहनाएं, क्योंकि इससे पसीना फंस सकता है और खुजली की समस्या बढ़ सकती है।
2. नीम और हल्दी का उपयोग:
नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो त्वचा की समस्याओं को ठीक करने में सहायक होते हैं।
हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जिससे सूजन और खुजली कम हो सकती है।
नीम के पत्तों को पानी में उबालें और ठंडा करके उस पानी से बच्चों को नहलाएं।
हल्दी और पानी का पेस्ट बनाकर हल्के-हल्के दानों पर लगाएं, ताकि संक्रमण में आराम मिल सके।
3. त्वचा को मॉइस्चराइज करना:
बच्चों की त्वचा पर नमी बनाए रखने के लिए नारियल तेल, जैतून का तेल या कोई हल्का मॉइस्चराइज़र लगाएं।
ये त्वचा को सूखने से बचाएगा और खुजली कम करेगा। खासकर नहाने के बाद, मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।
4. धूप से बचाव:
बच्चों को सीधे धूप में भेजने से पहले हल्का सनस्क्रीन लगाएं, ताकि UV किरणों का असर कम हो सके।
उन्हें बहुत ज्यादा देर तक धूप में खेलने न दें। खासकर दोपहर में धूप तेज होने पर घर के अंदर रखें।
5. पर्याप्त जल का सेवन:
बच्चों को नियमित रूप से पानी पिलाएं। पानी त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ रहती है।
6. साफ-सफाई का ध्यान रखना:
बच्चों के कपड़े रोज़ धोएं और उन्हें साफ-सुथरे रखें, ताकि पसीने और धूल-मिट्टी के कारण बैक्टीरिया न पनपें।
त्वचा को मुलायम कपड़े से पोछें, ताकि रैशेज या दाने न बढ़ें।

डॉक्टर से कब मिलें?
अगर दाने और खुजली में सुधार नहीं हो रहा हो।
दाने बढ़ रहे हों, या उनमें से पस निकलने लगे।
खुजली इतनी हो कि बच्चे रात में सो न सकें।
दाने बहुत दिनों तक ठीक न हो रहे हों।
इन उपायों से बच्चों को बदलते मौसम में त्वचा की समस्याओं से राहत मिल सकती है, लेकिन अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।