मौसम बदलने के कारण होने वाली कुछ आम बीमारियाँ इस प्रकार हैं:
1. सर्दी-जुकाम: मौसम बदलते समय वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें सर्दी, जुकाम और फ्लू आम होते हैं। ये अक्सर ठंड के मौसम या बारिश के बाद होते हैं।
2. खांसी: यह भी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होती है, जो मौसम में बदलाव के दौरान ज्यादा देखी जाती है।
3. एलर्जी: बहुत से लोगों को मौसम बदलने पर धूल, पराग (pollen) या अन्य प्रदूषकों से एलर्जी हो जाती है। इसके कारण छींक आना, नाक बहना और आंखों में खुजली जैसी समस्याएँ होती हैं।
4. बुखार (फ्लू या वायरल फीवर): वायरल बुखार भी मौसम बदलने के साथ फैलता है, जो शरीर में कमजोरी, सिरदर्द और बदन दर्द जैसे लक्षण उत्पन्न करता है।
5. त्वचा संबंधी समस्याएँ: जैसे-जैसे मौसम बदलता है, कुछ लोगों को त्वचा में खुजली, ड्राइनेस या लाल चकत्ते हो जाते हैं। ठंड के मौसम में त्वचा शुष्क हो जाती है और गर्मियों में पसीने के कारण चकत्ते हो सकते हैं।
6. अस्थमा और श्वसन समस्याएँ: जिन लोगों को अस्थमा या साँस की दिक्कतें होती हैं, उन्हें मौसम में बदलाव के दौरान ज्यादा परेशानी हो सकती है, खासकर जब ठंडी हवा या पराग (pollen) की मात्रा बढ़ जाती है।

मौसम बदलने से होने वाली बीमारियों से बचाव और उपचार के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. सर्दी-जुकाम और फ्लू का बचाव:
बचाव:
अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं, खासकर खाने से पहले और बाहर से घर आने पर।
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और मास्क पहनें।
विटामिन C युक्त फल जैसे संतरा, आंवला और नींबू का सेवन करें, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है।
शरीर को गर्म रखें, खासकर ठंड के मौसम में, और गीले कपड़े तुरंत बदल लें।
उपचार:
घर पर आराम करें और गर्म पेय पदार्थ जैसे तुलसी और अदरक की चाय पिएं।
यदि लक्षण बढ़ रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें और उचित दवाइयां लें।
2. खांसी का बचाव और उपचार:
बचाव:
ठंडे और प्रदूषित वातावरण से बचें।
अदरक, शहद और हल्दी वाले गरम पानी का सेवन करें, जिससे गले में राहत मिलेगी।
उपचार:
घरेलू नुस्खों में शहद और अदरक का मिश्रण फायदेमंद होता है।
डॉक्टर की सलाह से खांसी की सिरप या दवाएं लें।
3. एलर्जी से बचाव और उपचार:
बचाव:
जब एलर्जी फैलने का समय हो, तो खिड़कियां बंद रखें और घर में सफाई पर ध्यान दें।
नाक और आँखों को बार-बार रगड़ने से बचें और बाहर से आने के बाद हाथ-मुंह धोएं।
उपचार:
एंटी-एलर्जिक दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें।
नाक के लिए सलाइन नेज़ल स्प्रे या भाप लेना लाभकारी हो सकता है।
4. बुखार (फ्लू या वायरल फीवर) का बचाव और उपचार:
बचाव:
साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और संक्रमित लोगों से दूरी बनाएं।
पर्याप्त नींद लें और संतुलित आहार का सेवन करें जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बनी रहे।
उपचार:
बुखार के लिए पेरासिटामोल जैसी दवाएं लें (डॉक्टर की सलाह पर)।
शरीर को आराम दें और तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
5. त्वचा की समस्याओं का बचाव और उपचार:
बचाव:
ठंडे मौसम में त्वचा को मॉइस्चराइज़ करें और ड्राईनेस से बचाने के लिए तेल का उपयोग करें।
गर्मियों में त्वचा को धूप से बचाने के लिए सनस्क्रीन का उपयोग करें।
उपचार:
खुजली के लिए एंटी-एलर्जिक क्रीम का उपयोग करें।
यदि समस्या अधिक हो तो त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) से परामर्श लें।
6. अस्थमा और श्वसन समस्याओं का बचाव और उपचार:
बचाव:
ठंडे और धूल भरे वातावरण से दूर रहें।
साँस लेने में सहायता के लिए डॉक्टर द्वारा दिए गए इनहेलर का उपयोग करें।
उपचार:
अगर अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं तो तुरंत चिकित्सीय सहायता लें।
नियमित रूप से इनहेलर या डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का प्रयोग करें।
सामान्य सुझाव:
संतुलित आहार: पौष्टिक आहार लें जिसमें विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में हों।
व्यायाम और योग: नियमित रूप से व्यायाम और योग करें, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
पर्याप्त पानी पिएं: बदलते मौसम में हाइड्रेशन बनाए रखना