
1. मधुमेह नियंत्रण:
- करेला में पाए जाने वाले विशेष यौगिक (कराटिन) रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। यह इंसुलिन के स्राव को बढ़ाता है, जो मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक है।
2. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद:
- करेला खाने से पाचन तंत्र बेहतर होता है। यह कब्ज, एसिडिटी, और पेट की गैस को कम करता है।
- यह आंतों की सफाई करता है और पेट में पाचन प्रक्रिया को सुधारता है।
3. वजन घटाने में मददगार:
- करेला कम कैलोरी और वसा रहित होता है, जिससे यह वजन घटाने में मदद करता है।
- इसके सेवन से शरीर में फैट कम होता है और चयापचय (मेटाबॉलिज्म) बढ़ता है।
4. त्वचा के लिए लाभकारी:
- करेला के रस में एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को निखारने और त्वचा से संबंधित समस्याओं जैसे एक्ने, फोड़े, और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं।
5. रक्त शुद्धि:
- करेला का सेवन रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है। यह रक्त से विषाक्त पदार्थों को निकालने में सहायक होता है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।
6. लिवर और किडनी के लिए लाभकारी:
- करेला लिवर की सफाई करता है और उसके कार्य को सुधारता है। यह पीलिया (जॉन्डिस) और अन्य लिवर से संबंधित समस्याओं में सहायक होता है।
- किडनी के कार्य को बेहतर बनाने में भी मदद करता है और मूत्र संबंधी समस्याओं को दूर करता है।
7. हृदय स्वास्थ्य:
- करेला का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और हृदय संबंधी बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
8. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है:
- करेला में विटामिन C की मात्रा अधिक होती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और शरीर को संक्रमण से बचाता है।
9. कैंसर निरोधक गुण:
- करेला के यौगिकों में कैंसर से लड़ने वाले गुण होते हैं। यह शरीर में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में मदद करता है।

करेला का रस, सब्जी, और सूखे पाउडर के रूप में उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, इसे सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए क्योंकि इसका अत्यधिक सेवन हानिकारक हो सकता है।
करेले के नुकसान
अत्यधिक सेवन से पेट की समस्याएं:
करेला का अत्यधिक सेवन करने से पेट में गैस, ऐंठन, और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ब्लड शुगर में अचानक गिरावट:
मधुमेह के रोगियों के लिए करेला फायदेमंद होता है, लेकिन इसके अधिक सेवन से ब्लड शुगर का स्तर अचानक कम हो सकता है, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक:
करेला में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय में संकुचन का कारण बन सकते हैं और गर्भपात का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
ज्यादा कड़वाहट:
करेला अत्यधिक कड़वा होता है, जिससे कुछ लोगों को इसकी कड़वाहट सहन नहीं होती। इसका अत्यधिक सेवन जी मिचलाना या उल्टी का कारण बन सकता है।
लिवर एंजाइम्स में असंतुलन:
करेला के अत्यधिक सेवन से लिवर एंजाइम्स का असंतुलन हो सकता है, जिससे लिवर को नुकसान पहुंचने की संभावना होती है।
थायरॉइड समस्याएं:
कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि करेला का अत्यधिक सेवन थायरॉइड की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।नोट: करेला का सेवन संतुलित मात्रा में करने से इसके लाभ मिलते हैं। अगर किसी व्यक्ति को इससे कोई भी असुविधा या दुष्प्रभाव महसूस होता है, तो उसे इसका सेवन बंद करके डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
